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हरम की औरतों में गुलाम कादिर रखता था दिलचस्पी मुगल बादशाह की भी आंखें निकलवा के किया बेइज़्ज़त –

वो मुगल बादशाह जिसकी रोहिल्ला सरदार ने आंखें निकाली और उस घटना की तस्वीर भी बनवाई-

बात उस वक़्त की है जब मुगलिया सल्तनत अपने आखरी दौर में थी. और सिंहासन पर बैठा था तैमूर वंश का 17वां बादशाह शाह आलम द्वितीय. अगस्त सन 1788 को लालकिले में कुछ ऐसा हुआ जिसका  गुमान भी नहीं किया जा सकता है  बादशाह शाह आलम द्वितीय. बादशाह शाह आलम द्वितीय योग्य शासक नहीं था लेकिन ब्रज और फ्रारसी की कविताओं का बादशाह शाह आलम द्वितीय को बहुत अधिक ज्ञान था . चूंकि बादशाह शाह आलम द्वितीय की रगों में मुगलिया खून दौड़ रहा था और उसी विरासत का बादशाह शाह आलम द्वितीय भी हिस्सा था, इसलिए बादशाह शाह आलम द्वितीय चर्चा में रहता था, लेकिन अगस्त 1788 को लालकिले में कुछ ऐसा हुआ जिसका तस्स्वुर भी नहीं किया जा सकता है

बादशाह शाह आलम द्वितीय की अपने दरबार में बेइज़्ज़ती-

बिना किसी रोक टोक के अपने दो हजार सैनिकों को लेकर अफगान सरदार रोहिल्ला गुलाम कादिर बादशाह शाह आलम द्वितीय के शाही दरबार में पहुंचा. उसने बादशाह शाह आलम द्वितीय से खजाने की जानकारी मांगी. बादशाह शाह आलम द्वितीय ने कहा, मेरे पास कोई खज़ाना नहीं है. जो कुछ मुझे विरासत में मिला बस वही है मेरे पास और वो भी अब तुमने ले लिया है . यह बात सुनकर गुलाम कादिर ने उसे अपमानित करने की धमकी दी. आपको बता दे की इस घटना का जिक्र जदुनाथ सरकार ने अपनी किताब ‘फॉल ऑफ मुग़ल एम्पायर’ में किया है. जदुनाथ सरकार लिखते हैं कि अफगान सरदार रोहिल्ला गुलाम को जब बादशाह शाह आलम द्वितीय की बात पर यकीन नहीं हुआ तो उसने बादशाह शाह आलम द्वितीय धक्का दे दिया और शाही तख्त पर बैठ गया. बगल में रखे हुक्के का धुआं मुंह में भरकर बड़ी ही बुरे तरीके से बादशाह शाह आलम द्वितीय के मुंह पर छोड़ा.उसने बादशाह शाह आलम द्वितीय को युहीं नहीं छोड़ा. पहले उसने बादशाह शाह आलम द्वितीय को गद्दी से उतारा फिर धूप में भूखा-प्यासा रखा. और इस बिच बार-बार छिपाए गए धन के बारे में पूछता रहा.

 

गुलाम कादिर ने बेरहमी की सारी हदें पार कर दीं-


धूप में सजा काटते हुए बादशाह शाह आलम द्वितीय ने उससे कहा, मेरे पास जो कुछ भी था वो पहले ही तुम ले चुके हो. अब क्या धन मेरे पेट में है? इस पर गुलाम कादिर ने उपहास करते हुए कहा, हो सकता है धन तुम्हारे पेट में हो, तुम्हारे पेट को चीरकर ही मुझे देखना पड़ेगा .

बड़ा ही बेरहम था गुलाम कादिर-

गुलाम कादिर ने बेरहमी की हदें तोड़ दी उसके जुल्म की इन्तेहा न रही . उसने पहले बादशाह शाह आलम द्वितीय की आंखों में सुई घौंपी . बादशाह शाह आलम द्वितीय को अंधा बनाया. इसके बाद बादशाह शाह आलम द्वितीय के सीने पर बैठ गया.वो जालिम नीचे की तरफ झुका और खंजर से बादशाह शाह आलम द्वितीय की आंख निकाल ली. फिर दूसरी आंख भी निकलवाई. व्वो ज़ालिम गुलाम कदीर यहीं नहीं रुका. उसने दरबारी चित्रकार को बुलाया और उस घटना को हुबहू कागज पर उतारने को कहा. इस घटना के बादशाह शाह आलम द्वितीय को कई उस ज़ालिम ने कई दिनों तक पानी तक नहीं दिया . उस दौरान जिन-जिन लोगों ने गुप्त रूप से बादशाह शाह आलम द्वितीय की मदद की वो सब गुलाम कादिर की ज़ुल्म का शिकार बने गए .

अफगान का बदला खामोश रहता है, पर मरता नहीं-

बादशाह शाह आलम द्वितीय को पैरों में गिड़गिड़ाता देखकर, गुलाम कादिर कहता है कि मैंने तुम्हारे साथ वही किया है जो तुमने मेरे साथ किया है. एक अफगान का बदला खामोश रह सकता है, लेकिन कभी मरता नहीं.गुलाम कादिर की इस बेरहमी के पीछे इतिहास का वो किस्सा है जिसका ताल्लुक  बादशाह शाह आलम द्वितीय से रहा है.

गुलाम कदीर ने ऐसा क्यों किया-

आपको बता दे की गुलाम कादिर एक अफगान रोहिल्ला की शाखा के सरदार रहे चुके जबिता खान का बेटा था. यह वही जबिता खान था जिसको शाह आलम द्वितीय ने 29 दिसंबर 1770 को मुगल सेना का सेनापति घोषित किया था. इस पद को पाने के बाद जबिता खान और रोहिल्लों ने मिलकर राज-विद्रोह किया. बादशाह शाह आलम द्वितीय का आदेश मानने से इंकार किया. बादशाह शाह आलम द्वितीय की बहन को बेइज्जत किया. बादशाह शाह आलम द्वितीय कमजोर हो रहे थे, इसलिए इसका बदला लेने के लिए बादशाह शाह आलम द्वितीय ने मराठा सरकार महादाजी शिंदे से मदद ली. दोनों ने वहां हमला किया जहां जबिता खान रहा करते थे उस जगह का नाम पत्थरगढ़ था. हमले की बात सुनकर जबिता खान वहां से भागा, लेकिन ज्यादा दूर तक नहीं जा सका और पकड़ लिया गया.


पत्थरगढ़ के लोगों को लूटा गया और उनकी औरतों का बलात्कार किया गया था .

जबिता खान की मौत के बाद मराठों ने अगले दिन गुलाम कदीर के किले से लोगों को निकाला और उन लोगों से लूटपाट की, उनकी महिलाओं का बलात्कार किया और लोगों को बेइज़्ज़त किया। और फिर उसके बाद वहां के लोगों को बंदी बनाकर दिल्ली लाया गया. उन बंदियों में जबिता खान और उसका 8 साल का बेटा गुलाम कादिर भी था. बादशाह शाह आलम द्वितीय गुलाम कादिर को बेटे की तरह पालने लगे, लेकिन जबिता खान ने बादशाह शाह आलम द्वितीय के खिलाफ साजिश रचना नहीं छोड़ा. उस दौरान कई दरबारियों ने बादशाह शाह आलम द्वितीय को दुश्मन के बेटे गुलाम कादिर को मार देने की बात कही, पर बादशाह शाह आलम द्वितीय ने किसी की भी नहीं सुनी.

हरम की औरतों में गुलाम कादिर की दिलचस्पी-

एक दिन बादशाह शाह आलम द्वितीय को खबर मिली कि गुलाम कादिर उनके हरम की औरतों में कुछ ज्यादा ही दिलचस्पी ले रहा है. यह बात सुनकर बादशाह शाह आलम द्वितीय ने गुलाम कादिर को दवा देकर बेहोश करवाया और बधिया करवा दिया. गुलाम कादिर जब होश में आया तो यह जानकर उसे बहुत सदमा पहुंचा.गुलाम कादिर बड़ा हुआ और वो उसी रास्ते पर चला जिस रास्ते पर उसके पिता और दादा चले थे. उसने बादशाह शाह आलम द्वितीय को सेनापति बनाने के लिए  मजबूर कर दिया. नतीजा ये हुआ की बादशाह शाह आलम द्वितीय को उसे वो पद देना पर मजबूर होना पड़ा। और अंत में वो दिन भी आया जिसके बारे में दरबारी अक्सर बादशाह शाह आलम द्वितीय को सावधान रहने के लिए कहा करते थे और उसने बादशाह शाह आलम द्वितीय पर ऐसी क्रूरता दिखाई कि मुगलों के भी होश उड़ गए.

निष्कर्ष 

तो दोस्तों मुगलो के इतिहास से जुड़ी जानकारी हम आपके लिए लेकर आये थे ऐसी ही मज़ेदार और आश्चर्जनक जानकरी पाने के लिए हमारी वेबसाइट को सब्सक्राइब करें और पोस्ट को लाइक और कमेंट ज़रूर करें

 

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