5 Best South Indian Movie – साउथ इंड्रस्ट्री की वो फिल्मे जो KGF से लेती है आमने सामने की टक्कर

KGF 2 से भी ज़्यादा ज़बरदस्त हैं साउथ की ये 5 फिल्में देखकर भूल जायँगे KGF 2 को भी (Best South Indian Movie)-

दोस्तों KGF 2 एक एंटी ग्रैविटी फिल्म है.cये एक ऐसी फिल्म है. जहां मेकर्स हीरो को लार्जर दैन लाइफ दिखाने के चक्कर में फिज़िक्स के नियमों से टक्कर ले लेते हैं. KGF 2 फिल्म ने अपने पहले छह दिनों में ही 645 करोड़ रुपए कमा लिए थे. दोस्तों लेकिन सिर्फ KGF 2 ही वो फिल्म नहीं है. जिसमे हीरो ऐसे देखे हों जो लड़की को “सबक” सिखाना अपना फ़र्ज़ समझते हों. या फिर दर्जनों गुंडों को धूल चटा देते हो. आपको बता दे की ऐसी फिल्मों का एक सेट टेम्पलेट है. इसलिए KGF 2 देखने के बाद अगर किसी का जी नहीं भरा हो, ज्यादा मज़ा लेना हो तो आपको ऐसी ही कुछ और फिल्में के बारे में बताते हैं, जहां हीरो ऐसी ही हरकतें करता है.

 

साउथ की वो फिल्मे जो KGF 2 से लेती है टक्कर-

1. साउथ इंड्रस्ट्री की फिल्म उग्रम(Ugram)-

ugram

साउथ की फिल्म उग्रम जिसके डायरेक्टर: प्रशांत नील है. और इसको कास्ट श्रीमुरली, हरिप्रिया, तिलक ने किया है.  दोस्तों साउथ के परदे पर रॉकी भाई को लाने से पहले प्रशांत नील पिच रेडी कर रहे थे. ऐसा उन्होंने किया एक और लार्जर दैन लाइफ हीरो के ज़रिए. लेकिन KGF के फैन्स को प्रशांत नील की डेब्यू फिल्म ‘उग्रम’ ज़रूर देखनी चाहिए. उनको  साउथ की  इस फिल्म ‘उग्रम’ में पहली फिल्म वाली रॉ-नेस देखने को मिलेगी. इस उग्रम फिल्म की कहानी का सेंट्रल कैरेक्टर एक कॉमन मैन है. जो अपने आसपास जुर्म होते देखता है, और फिर उसके खिलाफ खड़ा हो जाता है. ये साउथ सिनेमा की दुनिया में कोई नया नहीं है. लेकिन ‘उग्रम’ के लिए काम करने वाला फैक्टर था. KGF की तरह ही प्रशांत

 नील ने फिल्म के विज़ुअल फ़ील पर स्पेशल ध्यान दिया था. KGF फिल्म की ही टीम से सिनेमैटोग्राफर भुवन गौड़ा और म्यूज़िक डायरेक्टर रवि बसरूर भी ‘उग्रम’ के क्रू का अंश थे.  उग्रम फिल्म को बनने में करीब चार साल लगे थे लेकिन बॉक्स ऑफिस रेज नहीं बन पाई, लेकिन फिर भी इस फिल्म ने प्रशांत नील को इतना कॉन्फिडेंस दे दिया था . कि आज वो KGF जैसी फेमस हिट फिल्म बना पाएं. आप इस फिल्म को जी5 पर आसानी से देख सकते है.

 

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2. साउथ इंड्रस्ट्री की फिल्म रंगस्थलम(Rangsthalam)-

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साउथ की फिल्म रंगस्थलम के डायरेक्टर सुकुमार है. और इसको कास्ट राम चरण, समांथा प्रभु, जगपति बाबू ने किया है. आपको बता दे की हिंदी ऑडियंस के बीच तेलुगु फिल्मों के डायरेक्टर सुकुमार सन

 2021 में आई ‘पुष्पा: द राइज़’से फेमस हुए थे . इससे पहले उनका नाम हिंदी बेल्ट में उठा था. सं 2004 में आई फिल्म ‘आर्या’ से. लेकिन आपको बता दे की इन दोनों फिल्मों के बीच डायरेक्टर सुकुमार की एक और फिल्म आई थी, बड़े सुपरस्टार के साथ. ‘रंगस्थलम’ फिल्म की कहानी सेट है. इस फिल्म में ‘रंगस्थलम’ नाम के एक गांव है. जहां का मुखिया अपने आपको को भगवान की तरह मानता है, और गांववालों का बहुत शोषण करता है. तो फिर क्या उसके खिलाफ किसी को तो लोगों का मसीहा बनकर आना ही था. तो बस ये काम करता है. राम चरण का कैरेक्टर चिट्टी बाबू. आपको बता दे की ‘रंगस्थलम’ एक फॉर्मूला फिल्म है, जो अच्छाई और बुराई पटरी पर दौड़ती है. इस फिल्म में सुकुमार ने अपने दुश्मन को लार्जर दैन लाइफ बनाया, उनकी इस फिल्म में विलेन और हीरो की टक्कर अपने सामने की है ताकि हीरो को भी उसके बराबर लाकर खड़ा किया जा सके. अगर विलेन कमजोर होता और हीरो ताकतवर, तो इस फिल्म की कहानी ऑडियंस की आँखों में खटकती है. दोस्तों आप साउथ की फिल्म रंगस्थलम को डिज़्नी+ हॉटस्टार पर देख सकते है

 

 

3.साउथ इंड्रस्ट्री की फिल्म नेनोक्काडिने-

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साउथ की फिल्म नेनोक्काडिने  के डायरेक्टर: सुकुमार है और इसको कास्ट: महेश बाबू, कृति सैनन, सयाजी शिंदे ने किया है. दोस्तों फिल्म नेनोक्काडिने’ एक टिपिकल महेश बाबू फिल्म थी. जिसने रिलीज़ होने से पहले ही सोशल मीडिया को दो भागो में बांट दिया था. और उसकी वजह थी. फिल्म का एक पोस्टर. उस पोस्टर में महेश बाबू एक बीच पर चलते हुए

 पोज़ दे रहे थे , और वो पीछे मुड़कर देख रहे हैं. यहां तक सब ठीक था. लेकिन वो इस पोस्टर में पीछे मुड़कर देख रहे हैं. कृति सैनन की तरफ , जो अपने घुटनों के बल पर बैठी-बैठी उनके पीछे चली आ रही है. अब आपको फिल्म नेनोक्काडिने को सोशल मीडिया पर बांटने वाली कहानी ही बताते हैं. हुआ ये था कि फिल्म रिलीज़ होने से कुछ दिन पहले ही समांथा प्रभु ने एक ट्वीट किया और उसमे समांथा ने फिल्म का नाम नहीं लिया लेकिन , फिर भी महेश बाबू के फैन ग्रुप्स ने उन्हें टारगेट कर सोशल मीडया पर खूब ट्रोल किया. बाद में महेश बाबू ने भी समांथा की बात पर काफी नाराज़गी ज़ाहिर की थी. हीरो की सेंट्रिक फिल्मों में एक चीज़ हूत कॉमन होती है. की फिल्मो में हीरो के अलावा किसी किरदार की कोई आइडेंटिटी नहीं होती , उनके कोई एम्बिशन नहीं, होता  खासतौर पर फीमेल कैरेक्टर्स, की बात करें तो उन्हें अक्सर प्रॉप्स की तरह इस्तेमाल किया जाता है. नेनोक्काडिने फिल्म के साथ भी कुछ ऐसा ही था. इस फिल्म में आपको महेश बाबू के स्लोमोशन एक्शन शॉट्स देखने को मिलेंगे, बस इस फिल्म में फीमेल किरदार कमजोर दिखया गया है. आप नेनोक्काडिने को आसानी से यूट्यूब पर देख सकते है।

 

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4.साउथ इंड्रस्ट्री की फिल्म विवेगम(vivegam)-vivegam

साउथ की फिल्म विवेगम के डायरेक्टर सिवा है. और इसको कास्ट अजीत विवेक ओबेरॉय, अक्षरा हासन ने किया है. दोस्तों एक मास मसाला फिल्म दो काम करती है, एक ऐसी फिल्म जो थिएटर एक्सपीरियेंस को धुआंधार बना देती है. जहां आप हूटिंग करते है.और सीटियां बजाते नहीं थकते. दूसरी बात ये है की कि ये फिल्म हीरो के  फैन्स को शिकायत करने का मौका नहीं देती. यानी कम्प्लीट फैन सर्विस होती है.तो फिल्म हिट होती ही है. दोस्तों अजीत की ये फिल्म ‘विवेगम’ इन दोनों पैमानों पर सही बैठती है. दर्शक ऐसी कहानी में कोई लॉजिक नहीं ढूंढ़ते है. बस हीरो को कुछ गलत काम का विरोध करते देखते हैं, और एन्जॉय करते हैं. इस फिल्म के पहले सीन में एक नेगेटिव किरदार बोलता है. कि इस इलाके में आने के लिए हवा को भी मेरी परमिशन चाहिए. उसके बाद कट होता है. और फिर अजित दिखाई देते हैं. और हवा उनके बालों को छूकर गुज़र रही है. मेकर्स अच्छे से जानते हैं कि ऐसे ही मोमेंट्स पर सीटियां बजती हैं. फिल्म में कुछ वॉर सीक्वेंस भी हैं, वहाँ अजीत जो करते हैं.उसमें फैन्स दिमाग नहीं लगाते, बस ‘भाई क्या सीन है’ बोलकर एन्जॉय करते हैं. दोस्तों आप इस फिल्म को  डिज़्नी+ हॉटस्टार  पर देख सकते है।

 

 

5. साउथ इंड्रस्ट्री की ज़बरदस्त ऐक्‌श्‌न्‌ फिल्म ‘लुसिफ़र(Lucifer)’-

5.लुसिफ़र

साउथ की ज़बरदस्त ऐक्‌श्‌न्‌  भरपूर फिल्म ‘लुसिफ़र’ के डायरेक्टर: पृथ्वीराज सुकुमारण है. और इसको कास्ट किया है. मोहनलाल, मंजु वॉरियर, टोविनो थॉमस ने. आपको पता होगा की ज़मीन से जुड़ी

 कहानियां दिखाना मलयालम

 सिनेमा का मैन पॉइंट है. पृथ्वीराज सुकुमारण ने अपनी फिल्म ‘लुसिफ़र’ में दोनों फैक्टर जोड़ने की भरपूर कोशिश की है. ज़मीन की हकीकत भी और मास अपील भी. इस फिल्म की बुराई को हाइलाइट करती है, कि क्यों वो हमारी राजनीति से लेकर हमारे सर्वाइवल तक के लिए ज़रूरी है. लेकिन वही अपने हीरो को कहानी से बड़ा बनाने

 के चक्कर में फिल्म ये बात भूल जाती है. जैसे की  फिल्म के एक सीन की बात करें है. जहां मोहनलाल के किरदार स्टीवन को कुछ गुंडों ने घेर लिया है. और उनमें से एक ने स्टीवन ने माथे पर बंदूक तान रखी है. कुछ स्लो-मोशन शॉट्स, हवा में घूमते मुक्कों के बाद स्टीवन बंदूक थामे खड़ा दिखाई देता है. वो सिर्फ अपने हाथों से ही सभी को बुरी तरह घायल कर देता है. ‘लुसिफ़र फिल्म के ट्रेलर में भी ये दिखाया गया कि स्टीवन कोई आम आदमी नहीं है. ‘लुसिफ़र फिल्म बस उसी के स्केल को बड़ा करने में लगी रहती है.आप ‘लुसिफ़र फिल्म को अमेज़न प्राइम वीडियो पर आसानी से देख सकते है।

 

 

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